महाकुंभ की रौनक में छुपा है राज,
आस्था की छाया में मिलता है साज।
भीड़ में गूंजते भाईचारे के गीत,
हर दिल में बसता प्रेम का अनमोल मीत।
गंगा के किनारे संगम का अद्भुत दृश्य,
जहां हर इंसान हो जाता है अपने से सव्य।
मेला है ये, आशा और विश्वास का बंधन,
सभी का मिलन, दूर-दूर से आया अनंत।
यह महाकुंभ, आस्था और भाईचारे का संदेश देता,
हर दिल में उजियारा, हर सांस में जीवन संजोता।
चलो हम सब मिलकर मनाएं ये उत्सव अपार,
जहां प्रेम हो, भाईचारा हो, और विश्वास हो बेशुमार।
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