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महाकुंभ का हर मेला आस्था और भाईचारे का संदेश देता है, शायरी के रूप में

**महाकुंभ का हर मेला आस्था और भाईचारे का संदेश देता है, शायरी के रूप में:**

**1.**  
महाकुंभ का मेला, आस्था का उजाला,  
सभी धर्मों की राहें, यहाँ मिलती हैं प्याला।  
साधना की गंगा, बहे हर दिल में एक रंग,  
भाईचारे की गूंज हो, जब सभी मन हों संग।  

**2.**  
गंगा में बहे पाप, और दिलों में हो शांति,  
महाकुंभ का मेला, यही है उसकी बाती।  
हर कोई यहाँ रंगे, प्रेम के रंग में,  
आस्था और भाईचारे का सच्चा संगम।  

**3.**  
कुंभ के संग, मन मिलते हैं सच्चे,  
आस्था में बसी हैं भावनाएं सच्ची।  
भाईचारे की डोर, सबको जोड़ती जाती,  
महाकुंभ का मेला, यही तो है सिखाती।  

**4.**  
धर्म-जाति की दीवारें अब मिटाने आए,  
महाकुंभ में सब एक साथ छाए।  
आस्था की गंगा, भाईचारे का संदेश,  
हर मन में छुपे, प्रेम के अनेकों उर्देश।  

महाकुंभ का मेला सचमुच भाईचारे और प्रेम का अद्भुत प्रतीक है।

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