जितने रास्ते, उतने रास्ते पर हैं कदम,
महाकुंभ में आते लोग, जैसे कोई बड़ा क्रम।
हर दिल में है आस्था, हर कदम में विश्वास,
यात्रियों की भीड़ में बिखरे हैं सबका ख़ास।
देश-विदेश से आते हैं हर रूप, हर जाति,
महाकुंभ में शामिल होते हैं सभी को है शांति की बाती।
गंगा के तट पर संगम की हो बिनती,
जहां यात्री आते हैं, हर मन में होती है सत्य की हिम्मत।
हर गांव, हर शहर, हर देश से होता है आह्वान,
महाकुंभ में यात्री होते हैं सबसे ज्यादा, बसा हुआ है उनका ध्यान।
आस्था की ताकत, हर ओर व्याप्त होती है,
हर एक यात्री की आस्था एक दूसरे से जुड़ी होती है।
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