हे श्याम, बस कृपा बनाए रखना,
तुम्हीं से रोशन है मेरी हर गलियां।"
"दिल में सजा, दरबार तुम्हारा,
आँखों में बस गया नूर तुम्हारा।
अब क्या अर्पण करूँ मैं तुम्हें,
यह जीवन भी तो है बस तुम्हारा।
सांसों में गूंजे नाम तुम्हारा,
हर धड़कन में वास तुम्हारा।
हर कदम पर तेरी राह दिखे,
यह तन-मन भी है अधिकार तुम्हारा।
तुम्हारे बिना यह जीवन अधूरा,
तुमसे ही सजी है मेरी दुनिया।
हे श्याम, बस कृपा बनाए रखना,
तुम्हीं से रोशन है मेरी हर गलियां।"
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