**जब हँसी तेरी रहमत समझी नहीं,**
**तो ग़म की शिकायत भी होगी नहीं।**
**जो भेजा है तूने, वो सब कबूल,**
**तेरी मर्जी से शिकवा नहीं, कोई ग़िला नहीं।**
**जिसने खुशियों पे शुक्राना अदा ना किया,**
**उसे ग़मों पे फिर रोने का हक़ कहाँ?**
**तेरी मर्ज़ी पे सौंप दी हर घड़ी,**
**अब दर्द भी तेरा, दवा भी तेरा जहाँ।**
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें