**मुस्कान दी जो उसने, शुक्रगुज़ार क्यों न रहें,**
**गर दर्द भी मिला, तो बेकरार क्यों न रहें।**
**जो रब की रज़ा में खुशी ना मिली,**
**तो फिर अश्कों से शिकायत का हक़दार क्यों बनें?**
**जब हंसने पे शुक्रिया अदा नहीं किया,**
**तो रोने पे गिला भी कैसा?**
**जो कृष्ण की मर्ज़ी में रज़ा न मिली,**
**तो तक़दीर से शिकवा भी कैसा?**
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