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जिसने हंसने की सौगात दी थी Aansoo Shayari


शुक्रिया अदा न किया जो मुस्कुराहटों का,
तो फिर अश्कों की शिकायत कैसी?
जो रक्खा यकीन बस उसकी रज़ा पर,
तो फिर तक़दीर से नाराज़गी कैसी?

जिसने हंसने की सौगात दी थी,
उसी से ग़म की फरियाद कैसी?
जब हर लम्हा उसी का करम है,
तो तक़दीर से नाराज़गी कैसी?

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