मगर दिल को बड़ा नाज़ था अपनी मजबूती पर।
बस कोई अपना बनाकर तोड़ गया,
और हम बिखर गए अपनी ही सादगी पर॥
जल्दी टूटने वाले नहीं थे हम,
बस कोई अपना बनाकर तोड़ गया।
हम तो संभल ही जाते ग़म के सफ़र में,
पर वो एहसास ही छीनकर छोड़ गया॥
जल्दी टूटने वाले नहीं थे हम,
मगर दिल काँच सा बिखर गया।
बस कोई अपना बनाकर तोड़ गया,
और हम मुस्कुराने की अदाओं में रो गए॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें