जब कान्हा मेरे साथ हैं, तो डर किसका?
जब मुझे यकीन है, कान्हा मेरे साथ है,
हर दर्द में भी खुशियों की सौगात है।
कोई भी मुश्किल छू नहीं सकती मुझे,
जब कृष्ण की मुझ पर रहमत बरसात है।
हर साँस में बसती है मोहन की बंसी,
हर धड़कन में है उनकी मीठी फाँसी।
डर किसका, क्यों चिंता सताए,
जब कान्हा का प्रेम ही मेरी विरासी।
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