ममता कुलकर्णी के संन्यास से प्रेरित कुछ शायरी प्रस्तुत हैं:
शोहरत की राहें मोड़ आई वो।
जिसे कहते थे कभी फ़िल्मों की रानी,
अब ख़ुदा की राह में खो गई वो।
जिसने थी महफिलों की शान कभी,
आज तन्हाई में सुकून पा लिया।
छोड़कर जग की रंगीनियां,
ख़ुदा से रिश्ता बना लिया।
जिसे चाहा था ये ज़माना कभी,
आज वो ख़ुद को मिटा बैठी।
न दौलत, न शोहरत की चाहत रही,
बस इबादत में जी रही।
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