ममता कुलकर्णी के संन्यास से प्रेरित शायरी:
1.
नज़ाकत थी कभी जिस चेहरे पर, अब सुकून की चादर है,
चमकती दुनिया छोड़ी उसने, अब रूह से उसका सफर है।
2.
जिसे शोहरत की राहों में कभी साया भी न मिला,
वो खुद को खोकर आज खुदा के करीब मिला।
3.
जिस रंगीन जहां की थी रौनक कभी,
आज उसी को देखती है दूर से, अजनबी।
4.
नाम, शोहरत, दुनिया के सब गहने उतार दिए,
रूह की तलाश में खुद को ही संवार दिए।
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