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महाकुंभ पर कुछ बेहतरीन शायरी आपके लिए प्रस्तुत है: आस्था और श्रद्धा का सैलाब पावन कुंभ का पर्व साधु-संतों का मेला पुण्य की डुबकी

महाकुंभ पर कुछ बेहतरीन शायरी आपके लिए प्रस्तुत है:  

***1. आस्था और श्रद्धा का सैलाब***  
नदी के जल में श्रद्धा की बहार आई है,  
महाकुंभ में आस्था की ज्योत जगाई है।  
हर हर गंगे की गूंज से गूंज उठे घाट,  
हर भक्त के मन में भक्ति समाई है।  

***2. पावन कुंभ का पर्व***  
गंगा की गोद में उमड़ा जनसैलाब,  
हर ओर गूंजे हरि के जाप।  
सदियों से ये परंपरा निभाई जाती है,  
महाकुंभ में मोक्ष की राह पाई जाती है।  

***3. साधु-संतों का मेला***  
जहां साधु-संतों की होती है टोली,  
हर कोई यहां छोड़ता है अपनी होली।  
मन की शुद्धि और आत्मा का मेल,  
महाकुंभ में मिलता है जीवन का खेल।  

***4. पुण्य की डुबकी***  
डुबकी लगाई गंगाजल में, पाप कट गए,  
बचपन से किए सारे पाप हट गए।  
महाकुंभ में आया तो समझा यह बात,  
जीवन का असली अर्थ प्रभु के साथ।  


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