महाकुंभ पर कुछ शानदार शायरियाँ पेश हैं:
1. आस्था और श्रद्धा
कुंभ का मेला सजा, गूंजे हर-हर गंगे,
डुबकी लगाते भक्त, मिटे पाप के धंगे।
2. पवित्र स्नान
पावन जल में जब तन-मन नहाए,
हरि का नाम लब पे आए।
सदियों से चलता ये मेला अनोखा,
जहाँ हर भक्त मोक्ष को पाए।
3. सन्यासी और संत
कुंभ में संतों की टोली आई,
ज्ञान की गंगा फिर लहराई।
भक्ति में डूबे हैं नर-नारी,
मोक्ष का संदेश सजीव कराई।
4. आध्यात्मिक यात्रा
हर कदम पर श्रद्धा की धारा,
संगम तट पर मेला प्यारा।
हरि के नाम का गूंजा नारा,
कुंभ में सबने जीवन संवारा।
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