चाँदनी रात में तेरा अज़ाब देखा।
चाहा था तुझे बेइंतहा अपनी बाहों में,
मगर तक़दीर ने लिखा था बस ख्वाब देखा।
नामुमकिन सा मैंने एक ख्वाब देखा,
चांद के शहर में तेरा जवाब देखा।
मोहब्बत की राहों में था अंधेरा बहुत,
पर तेरी आँखों में एक आफताब देखा।
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