मैं जानना चाहता हूँ कि लोग मेरे बिना क्या बोलते हैं. दिल से अपनी सच्चाई सुनो, जो छल बोलते हैं उनकी खामोशी बेमानी है.
मुझे समझ में आ रहा है
पीठ पीछे की बातें और सामने वाले की मर्जी समझकर, मुस्कुराते लोगों के गहरे जख्मों को पहचान रहा हूँ.
अंतर की पहचान हो रही है
पीठ पीछे की बातें देखने में लोगों को मुश्किल होती है, लेकिन सामने वाली ईमानदारी में जिंदगी के रंग साफ दिखते हैं।
असली रंग जानना
पीठ पीछे की बातें आखिर में सामने आ ही जाती हैं। सामने वाली इमानदारी में ही जिंदगी के असली रंग दिखते हैं।
सच्चाई का पर्दाफाश
पीठ पीछे की बातें बस हवा के झोंके हैं; सामने की सच्चाई में असलियत की झरोके छुपी हैं।
सच्चाई के सामने
पीठ पीछे की बातें सामने आकर सच की थाह देती हैं, झूठ के रंग बिखरते हैं।
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