खाटू के राजा का निराला है दरबार,
सांवले सरकार की अद्भुत है सरकार।
जो भी आया शरण में श्याम तेरी,
सँवर गया उसका बेड़ा पार।।
—
जब भी मैं दुखों से घिर जाता हूँ,
श्याम तेरे दर पे चला आता हूँ।
तेरी रहमत से कटती हैं उलझनें,
तेरे चरणों में सुकून मैं पाता हूँ।।
—
श्याम बिना ये जीवन अधूरा लगता है,
हर सपना जैसे टूटा सा लगता है।
खाटू के दर्शन जब मिल जाते हैं,
तो हर दर्द भी अपना सा लगता है।।
**जय श्री श्याम!**
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