**शुक्रिया तक नहीं किया मुस्कुराहटों का,**
**तो गिला आंसुओं का फिर क्यूं करें?**
**जो मिला, वो भी कम नहीं था,**
**जो छूट गया, उसका गम क्यों करें?**
**मोहब्बत में शुक्रिया हो या शिकायत, ये कैसा हिसाब रखते हो?**
**खुशियों का ज़िक्र नहीं, पर ग़मों की किताब रखते हो!**
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